*** तेरी ख्वाहिश ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

क्या कहूं एक तेरी ख्वाहिश
है कि मिटती ही नहीं

जितना करता हूं तेरा दीदार
उतना ही खाली होता जाता हूं

तेरे साथ भरी भरी ये जिंदगी
सुकून से जीने को कहती है

दूसरी ओर मौत मुझसे नजदीकियां
कायम करने को आमादा है

अब बता जिंदगी से हार जाऊं या
मौत की जंग में जीतकर आऊं

फैसला करना है अब तुमको अब
गले मौत को लगाऊं या तुमको ।।

👍 मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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