8.इन्तजार

Versha Varshney

रचनाकार- Versha Varshney

विधा- कविता

बिन तेरे क्यों थमी सी लगती है जिंदगी ,
कहाँ है तू बता …………….ऐ हमनशी ।
बहार भी लगती आजकल खामोश है ,
जीने का न अब कोई मकसद बचा है ।।
गीत भी अधूरे हैं ……………. बिन तेरे ,
लगती है जिंदगी भी मेहमाँ कुछ पल की।
हर पल आँखों को एक इन्तजार है ,
शायद तू यहीं कहीं ……..आस पास है ।।

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Versha Varshney
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कवियित्री और लेखिका अलीगढ़ यू पी !_यही है_ जिंदगी" मेरा कविता संग्रह है ! विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में लेखन ! साझा संकलन -१.भारत की प्रतिभाशाली हिंदी कवयित्रियाँ ! २.पुष्पगंधा pride of the women award 2017 Money is not important then love,bec love is God n God is our life . my blog -http://vershavarshney.blogspot.in/ my page -https://www.facebook.com/versha22.writer/?ref=aymt_homepage_panel .
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