इज़हारे बफा

Madhu Nagar

रचनाकार- Madhu Nagar

विधा- कविता

इजहारे बफा करते है वो शौक़ से ,
क्या करे यह हमें गवारा नहीं ।
इश्क़ में डूबे इतना कि तुम्हारा साथ हो
दर्दे इश्क़ सिर से उतारना गवारा नहीं ।
दिदारे यार चॉद मे करते हैं कभी कभी ,
सितारों को परेशान करना गवारा नहीं ।।
पत्थरों पर बहता झेलम का पानी क्या ?
रूनझुन तेरी पायल,पर यह झूठ गवारा नहीं ।
तसवूरे इश्क़ मे खोये इतना चले आओ
शायद यह इन्तज़ार चॉद चॉदनी को गवारा नहीं ।।
मधु

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Madhu Nagar
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लेखनी के माध्यम से अपनी कल्पना और भावात्मक विचारों की अभिव्यक्ति मुझे काव्य लेखन की ओर ले आई है । अतः आनन्द का अनुभव हो रहा है और मन में लिखने की उमंग बनी रहती है।
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