इच्छाओं का काफिला, कब होता है शांत !!

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

चाहे भारी भीड़ हो, ..या गुमसुम एकांत !
इच्छाओं का काफिला, कब होता है शांत !!

मजहब से बढकर रहे,सदा राष्ट्र का मान !
यही सिखाते है हमे, .गीता औ कुरआन !!

कितना भी भर दीजिये,ऊपर तक अतिरिक्त !
मन का भर कर भी रहे,सदा कमंडल रिक्त !!
रमेश शर्मा.

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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा
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