इक बार मुझे भर के नज़र देख लेने दो………………..

suresh sangwan

रचनाकार- suresh sangwan

विधा- गज़ल/गीतिका

इक बार मुझे भर के नज़र देख लेने दो
अपनी मोहब्बत का असर देख लेने दो

हर तस्वीर में मेरी तेरे ही रंग हों
उन तस्वीरों को जी भर देख लेने दो

मिट जाते हैं डूबकर इश्क़ के तूफ़ां में
उस शब की बस मुझको सहर देख लेने दो

तेरी खुश्बू से महके ये आलम सारा
उन गलियों से मुझे ग़ुजरकर देख लेने दो

होके बेखुद दुनियाँ से जम जायें मुझ पर
वो मस्ती में डूबी नज़र देख लेने दो

बरस रहें हैं बरसों दिल में कुछ अरमां
भीगा मौसम दिल में उतरकर देख लेने दो

शाखें लहरा के महके वज़ूद पर 'सरु' के
झुका हुआ उलफत का शज़र देख लेने दो

सुरेश सांगवान'सरु'

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