इक चारासाज़ चाहिए बीमार के लिए … A beautiful Ghazal by Shamshad Shaad

Shamshad Shaad

रचनाकार- Shamshad Shaad

विधा- गज़ल/गीतिका

दिल के सुकून ओ हिज्र के आज़ार के लिए
इक चारासाज़ चाहिए बीमार के लिए

हर बार मुस्तरद हुईं इस दिल की ख़्वाहिशें
तरसाया ही गया हूँ मैं दीदार के लिए

कमअक़्ल पर तो मार भी जैसे है बेअसर
काफ़ी है इक इशारा ही हुशयार के लिए

बस ठोकरें लिखी हैं हमारे नसीब में
माशूक़ तक मिला ना हमें प्यार के लिए

हर कोई अपनी ताक में बैठा है आजकल
कमियां हमीं में ढ़ूंढ़े है तकरार के लिए

अल्लाह मग़फ़िरत करे मोमिन की रूह की
अच्छी ज़मीन छोड़ी है अशआर के लिए

कल तक जो आगे पीछे मेरे घूमते थे शाद
आँखें दिखा रहे हैं वो अग़यार के लिए

शमशाद शाद, नागपुर
9767820085

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