आ सजाऊँ भाल पर चंदन तरुण

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- मुक्तक

चेतनामय लोकहित जागो निपुण
धरणि पर बैकुंठ का हो अवतरण
राष्ट्र पुलकित कहेगा सम्मान से
आ सजाऊँ भाल पर चंदन तरुण
़़़़़़़़़़़़़:़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" कृति का मुक्तक (परिष्कृत मुक्तक)
पेज -21
03-05-2017
साहित्यपीडिया पर प्रकाशित मेरी रचनाओं में से कुछ रचनाएं "जागा हिंदुस्तान चाहिए" कृति की रचनाएं है |"जागा हिंदुस्तान चाहिए" कृति की कुछ रचनाओं को परिष्कृत कर (सुधार कर)साहित्य पीडिया पर प्रकाशित किया गया है | साहित्य पीडिया पर प्रकाशित मेरी रचनाओं के अनुसार पाठक बंधु कृति की रचनाओं को परिष्कृत कर सकते हैं |

बृजेश कुमार नायक
सुभाष नगर ,कोंच
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता
03-05-2017

Sponsored
Views 123
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
बृजेश कुमार नायक
Posts 137
Total Views 33.4k
एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376एवं 8787045243 व्हाट्सआप-9956928367

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia