*** आफ़ताब कहूं या चाँद तुम्हें ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गीत

9.8.17 **दोपहर** 1.16

आफ़ताब कहूं या चाँद तुम्हें

नजरे करम करना मुझपे

नूरानी चेहरा तेरा ना जाने

उसपे किसका पहरा गहरा

आफ़ताब कहूं या चाँद तुम्हें

नजरें इनायत करना मुझपे

कहूं आफ़ताब मैं तुझको तो

पास तेरे कैसे मैं आऊं

तपिस दिल की बुझाने

फिर कहां मैं कैसे जाऊं

तेरे मुखड़े को अगर

चाँद का टुकड़ा कहूं

पूरण चाँद किसको कहूं

तुम हो पूर्णमासी का चाँद

तुझको मैं आधा कैसे कहूँ

प्यार ना आधा हो हमारा

मैं तुझको पूनम-चाँद कहूं

आफ़ताब कहूं या चाँद तुम्हें

नूर जो झलके तेरी आंखों में

उसका कैसे शुक्रिया अदा करूं

तुझ बिन जले हिया पिया मेरा

शीतल छाती अब कैसे करूँ

आफ़ताब कहूं या चाँद तुम्हें

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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