आह्वान

सौम्या मिश्रा अनुश्री

रचनाकार- सौम्या मिश्रा अनुश्री

विधा- हाइकु

उठो युवकों
नव जोश को भर
बनो चेतित

चेतना पूर्ण
होवे शाश्वत कर्म
नही पतित

हो स्वप्न सत्य
सत्य करो आह्वान
हो परिवर्तन

खत्म वेदना
दृढ भाव संचार
दृढ़ चेतना

लक्ष्य को जानो
करो ऊर्जा संचार
शक्ति को मानो

द्वेष मिटाओ
जीवन पहचानो
कैसा प्रहार

गले लगाओ
सभी से प्रेम करो
प्रेम आधार

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सौम्या मिश्रा अनुश्री
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धीरे - धीरे बढ़ते कदम। नया सवेरा करने रौशन।। दो कदम तुम भी चलो, दो कदम हम भी बढ़ें, करने को शब्द गुंजन। कुछ हाँथ तुम भी बढ़ाओ, कुछ हाँथ हमारे भी बढ़ें, करने साहित्य में हवन। सुगमित अमिय हुआ सवेरा , छटेगा तम जो था घनेरा, अब बनेगा उत्कृष्ट चमन। सबका साथ सबका विकास, दृढ़ निश्चयी होवे विश्वास, महके ये सारा उपवन। धीरे - धीरे बढ़ते कदम। नया सवेरा करने रौशन।। सौम्या मिश्रा अनुश्री

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