आस

amber srivastava

रचनाकार- amber srivastava

विधा- कविता

बेशुमार नाकामियों के बाद,जब कामयाबी का सूरज जगमगाता है,
ज़िन्दगी हो जाती है तारो से सजी,हर दिन दिल को लुभाता है I
बुरे दौर में लगता है ऐसे,जैसे वक़्त ये मुँह चिढ़ाता है,
थोड़ी गहराई में उतर के देखो,ये वक़्त ही हौंसला बढ़ाता है I
नाकामी से हर राह बंद दिखती,लगा हो जीवन पे अंधेरे का ताला,
हार ना मानो धीर धरो,अभी देगा दस्तक कोई उजाला I
साधारण से असाधारण बनाने को ही,ये वक़्त
आज़माइश करता है,
फटे हाल भी एक सच्चा दिलदार,मुस्कान की नुमाइश करता है I
कवि-अम्बर श्रीवास्तव

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amber srivastava
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