“सफलता और आस्तिकता में कोई संबंध नहीं”

Mahender Singh

रचनाकार- Mahender Singh

विधा- कविता

सफलता का श्रेय किसी एक खुशनसीब को मिलता है,
असफलता के लिए हर बदनसीब जिम्मेदार होता है,

सफलता में कौन आधार है,
कूटनीति मसालेदार है,
वरन् लोकतंत्र की कहां हार है,
संविधान में जन-मानुष की हर समस्या का समाधान है,

विवेक जगने न दिया इन सत्ता लोलुप लोगों ने..साधु संत डूबा है घर और व्यापार में,
पंच-विकार का डर दिखाते है,खुद उसी से
ग्रस्त पाए जाते है,

एक गांव बसा जितने ..वर्गफल में,
उतने में तो ये ..अपना कॉर्पोरेट चलाते है,
हम कमाते है…ये ठाठ से खाते है,
हम पाप-आत्मा ..ये पुण्यात्मा कहलाते है,

डॉ महेन्द्र सिंह खालेटिया,
महादेव क्लीनिक,
मानेसर व रेवाड़ी(हरियाणा).

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Mahender Singh
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पेशे से चिकित्सक,B.A.M.S(आयुर्वेदाचार्य)

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