** आसमां में सर अब उठा चाहिए **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- गज़ल/गीतिका

जिंदगी को अब विराम चाहिए
आदमी को अब आराम चाहिए
कशमकश जिंदगी में बहुत है
हल करने को हमराह चाहिए।।

जीवन की कश्ती को पतवार चाहिए
डूबने वाले को तो मझधार चाहिए
करले कोशिश एकबार फिर दिल से
साहिल को तिनके का सहारा चाहिए।।

मगरूर दिल को अहंकार चाहिए
दिल चाहता, गैर-इकरार चाहिए
मकां अपना है होने को खण्डर
गैर के दिल में बवंडर चाहिए।।

मसनद का भला आराम चाहिए
प्यारा सा आँखों-पैगाम चाहिए
नस नस में नशा छाया है अब
उल्फ़त का खुला पैगाम चाहिए।।

मैल मन का अब धुलना चाहिए
रंग प्यार का अब घुलना चाहिए
शक़्ल मालूम ना हो इकदूजे की
आईना भी अब झूमना चाहिए ।।

खत्ताओं का नही हिसाब चाहिए
चेहरे पर नहीं हिज़ाब चाहिए
जरा दिल से पर्दा उठा देखिए
सुहाना खुला दिलआसमां चाहिए।।

मुझे अब ना दिल का ख़ुदा चाहिए
मैं पत्थर हूं भला किसका चाहिए
जिंदगी की अब चाहत है किसको
नाहक़ ख़ुदी को अब क्या चाहिए।।

बेसहारा नहीं जो आसरा चाहिए
सहारा किसी का अब क्यूं चाहिए
बैशाखियाँ कब तक निभाएगी साथ
आसमां में सर अब उठा चाहिए।।

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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