आशियाना

कवि कृष्णा बेदर्दी

रचनाकार- कवि कृष्णा बेदर्दी

विधा- गज़ल/गीतिका

इसी दुनिया में कभी मैं भी ख़ुशनसीब था
इक छोटा सा था अपना भी आशियाना,
ख़ुश रहते थे बाते करते थे अपनो के संग में रहते थे सुन्दर था अपना भी आशियाना,
लगा इश्क़ का रोग हुए बदनसीब टूटा छोटा सा आशियाना हुये अपनो से बेगाना,
होकर बेगाना चल दिये अनजान सफ़र में पर भुले नहीं अपना छोटा सा आशियाना,
चल दिया अनजानी सफ़र में गुमनाम थी राहें ना कोई नाम था ना अपनी मंज़िल,
जाये किधर किससे मिले किसको कहे छूटा अपनो का साथ टूटा मेरा आशियाना,
दिल की बातें दिल से ही करते राहों में चलते-चलते भटक गये अपने सफ़र से,
राहें जो जो भटका दिल मेरा धड़का आँखो में नज़र आया इक टूटा हुआ आशियाना,
टूटे आशियाने की यादों में मेरा दिल भी टूटने लगा अपनो का साथ छूटने लगा,
अपनो की याद में आँखों से आँसू बहने लगे बहते आँसू में देखा टूटा हुआ आशियाना,

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कवि कृष्णा बेदर्दी
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कवि कृष्णा बेदर्दी ( डाक्टर) जन्मतिथि-०७/०७/१९८८ जन्मस्थान- मधुराई (तमिलनाडु) शिक्षा मैट्रिक -विलेपार्ले(मुम्बई) शिक्षा मेडिकल - B.A.M.S.(लन्दन) प्रकाशित पुस्तक- हिन्दी_हमराही,अनुभूति,महक मुसाफिर, तेलुगु, हिन्दी-तेलुगू फिल्मों में गीतकार शौक_ डांस,अभिनय,गिटार,लेखन, नम्बर- +918319898597 Email I'd kavibedardi@gmail.com, Facebook link https://m.facebook.com/Bedardi? Twitter_@kavibedardi

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