***आशा ***

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

फिज़ाओं में खुशबुएं भी हैं घुली घुली,
केवल जहर ही नहीं हवाओं की उड़न में।
आओ छुअन में एहसास करें जरा।।
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दुनिया में प्रेम और नेकी भी है रची बसी,
केवल बदी और घृणा नहीं इसके चलन में।
आओ मिल जुलकर एहसास करें जरा।।
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दिलों में मिठास औरअपनत्व भी है समाया,
सिर्फ कटुता व बेरुखी नहीं इसकी घुलन में।
आओ हृदय में कुछ एहसास करें जरा।।
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परमेश्वर है साथ तो दुनिया में कहां हैं गम,
साथ है उसका तो जग में खुशियाँ न हैं कम।
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उसके अस्तित्व का कुछ अहसास करें जरा।
दाता की करुणा पर कुछ विश्वास करें जरा।
सृष्टि के संचालक का आभास करें जरा।
विश्व को सुंदर बनाने का सुप्रयास करें जरा।
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—रंजना माथुर दिनांक 25/08/2017
(मेरी स्व रचित व मौलिक रचना )
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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