आरएसएस नंगा नाच रहा ।

प्रदीप कुमार गौतम

रचनाकार- प्रदीप कुमार गौतम

विधा- कविता

लोकतंत्र पर देखो भाई
आरएसएस नंगा नाच रहा
अपनी बात को रखने पर
खुले में पिटवा रहा
रोहित ऊना की घटनाओं को
नित्य रोज दोहरा रहा
सहारनपुर की जब बारी आई तो
माइक हाथ से छिनवा रहा
बाबा साहेब का नाम ले लेकर
संविधान की धज्जियां उड़ा रहा ।
शब्बीर पुर पर जब बोली मायावती जी
तो सभापति से चुप करवा रहा ।
लोकतंत्र की हत्या करके
देखो आरएसएस नंगा नाच रहा ।

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प्रदीप कुमार गौतम
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शोधार्थी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी(उ0प्र0) साहित्य पशुता को दूर कर मनुष्य में मानवीय संवेदनाओ का संचय करता है एवं मानवीय संवेदनाओ के प्रकट होने से समाज का कल्याण संभव हो जाता है । इसलिए मैं केवल समाज के कल्याण के लिए साहित्यिक हिस्सा बनकर एक मात्र पहल कर रहा हूँ ।

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