आयो, आयो, आयो रे वसंत

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
आयो, आयो, आयो रे वसंत,
छाई है जग में शोभा अनन्त।

बहे मंद – मंद शीतल बयार,
छेड़ जाये मेरे मन के तार।

खिले हैं सुन्दर फूल पलाश,
पीया से मिलन की है आस।

टेंसू के फूल लाल – लाल,
महके बहके हैं मेरी चाल।

लग गए हैं आमों में बौर,
दिल ना पाये कही भी ठौर।

ये मौसम जाने जादू-टोना,
बहके मन का कोना-कोना।

भवरों की मधुर-मधुर गीत,
दिल में रस घोले मन प्रीत।

सुनकर कोयल की कूक,
उठे मन में मीठी-सी हूक।

हवा में फूलों की सुगंध,
घुलते मादकता का गंध।

फूल-फूल पराग महके,
धानि चुनरिया मेरा लहके।

प्रकृति सौन्दर्य में निखार,
दहक उठे दिल में अंगार।

यह ऋतु अति सुहावनी,
सुखद बदलाव मनभावनी।
—लक्ष्मी सिंह 💓☺

Views 144
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
लक्ष्मी सिंह
Posts 188
Total Views 90.5k
MA B Ed (sanskrit) please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia