” —————————————- आम हो गयी गाली ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

रचनाकार- भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

विधा- गीत

अपशब्दों का दौर चला है , बात बात पर गाली !
हैं विचार स्वाधीन यहां पर , कुछ बटोरते ताली !!

पद की गरिमा भूल गये हैं , करते हैं मनमानी !
हेराफेरी शब्दों की है , होते ट्वीट सवाली !!

फिल्मों में भी चलन बढ़ा है , खूब गालियां बरसे !
खामोशी से सब स्वीकारें , जबरन बनें मवाली !!

सामाजिकता प्रश्न करे है , शिक्षा कैसी हमारी !
आत्मसात हम कर लेते हैं ,आम हो गयी गाली !!

गलती करना आदत सी है , जाने कब सुधरेगें !
समझौता करना सीखा है हम ना हुए बवाली !!

संविधान की सौगातों का , बेजा लाभ लिया है !
दायित्वों का भार न जाने , बस हक की रखवाली !!

बृज व्यास

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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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