आफत मे है जान

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

बिन पानी सब सून है, सत्य समझ इंसान !
किल्लत से अब नीर की,आफत में है जान !!

पानी का ढूँढा नहीं, हमने हल श्रीमान !
कहना जायज आपका, आफत में हैं जान !!

सोलह आने सत्य है, खतरे में हैं जान !
नदी सरोवर ताल पर ,दिया नहीं जो ध्यान !!

बिन पानी इंसान की , आफत में है जान !
हो चाहे वो राम फिर, या हो वो रहमान !!
रमेश शर्मा

Sponsored
Views 32
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
RAMESH SHARMA
Posts 175
Total Views 3.1k
अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia