*** आप वही हैं जो है ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

15.7.17 ** दोपहर ** 2.45
आप वही हैं,जो है,फिर क्यों डरते हो

डरते हो,फिर इतना क्यों मुझपे मरते हो

दिल फैंक-फैंक,फेक मुझे क्यों करते हो

चाहत दिल में मेरी और मुझसे ही डरते

है शायद पूर्व-परिचय अपना,यूं ही नही

बार-बार राहों में आ ख़ुद ही छलते हो

चलते हो चलन जमाने का जो है,फिर

देख मुझे,क्यों ठंडी आहे भरते हो फिर

आप वही हैं हम यहीं हैं आओ फिर-२

मुलाकात करें, हृदय की कुछ बात करें

आड़े आवे भीतभाव-दीवारें अब दूर करें

स्नेह-दीपक, ना बुझने को मजबूर करें

जलता है रोशन करने दिल-घर जिसका

वो क्यूं -कर आज ना उस पे मरे-मरे

हे हरे हरे हे हरेहरे प्यार से तूं परे-परे

है अज्ञात भय तुझको प्रिये क्यूं हर बार

ना छोड़ा अभी तक हमने भी घर-बार

खाया धोखा प्यार में हमने भी हर-बार

फिर भी प्रिये करता मन तुमपे विश्वास

शायद तुम वही हो जिसका है इंतजार

आ जाओ, छा जाओ,दिल वीराने में

क्या रखा है बार-बार आ-जमाने में

तुम वही हो, हां निश्चित तुम वही हो

आप वही हैं,जो है,फिर क्यों डरते हो

डरते हो फिर इतना क्यों मुझपे मरते हो

👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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