आपसे जो मिले खिल कमल हो गए

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- मुक्तक

दो मुक्तक
1
आपसे जो मिले खिल कमल हो गए
बोल भी प्यार की इक ग़ज़ल हो गए
ज़िन्दगी में मिली जो ख़ुशी आपसे
नैन भी बावरे हो सजल हो गए
2
बदल ये भले ही जमाना रहा है
मगर दर्द अपना पुराना रहा है
न आराम तन को , न है चैन में मन
कहाँ वक़्त पहला सुहाना रहा है

डॉ अर्चना गुप्ता

Views 180
Sponsored
Author
Dr Archana Gupta
Posts 223
Total Views 13.5k
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
6 comments