आपकी बेवफाई

Bikash Baruah

रचनाकार- Bikash Baruah

विधा- शेर

जरा सी बात पर आपको
क्यों इतना गुस्सा आया,
यकीन था हमें आपकी वफा पे
फिर क्यों हमें रुला दिया ।
आपको गर हमसे कोई शिकवा था
आप हमें हाल-ए-दिल बता देते,
मगर यों रुठ कर हमसे दूर जाकर
हमें छोड़ जाने की सजा तो न देते ।
अरमान थे हमारे दिल में
आपको अपना हमसफर बनायेंगे,
लेकिन पता न था अरमानों को आप
इस कदर कुचल कर चले जायेंगे ।
न जाने अब कैसे जी पायेंगे
बगैर आपके इस जहाँ में,
जो नफ्स लेते थे आपके लिए
उस नफ्स को छीन लिया आपने ।
जी भर चुका है मेरा
अब तो मौत ही है एक सहारा,
इतनी मेहरबानी कीजिए हम पर
कि निकले अब हमारा जनाजा।

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Bikash Baruah
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मैं एक अहिंदी भाषी हिंदी नवलेखक के रूप मे साहित्य साधना की कोशिश कर रहा हू और मेरी दो किताबें "प्रतिक्षा" और "किसके लिए यह कविता" प्रकाशित हो चुकी है ।

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