आदमी

Lakshya thakur

रचनाकार- Lakshya thakur

विधा- मुक्तक

कभी टूटे खिलोने के लिए रोये
कभी टूटे दिल से भी मुस्कराये
जाने कौन सी मिट्टी से बना है आदमी
सूखकर, टूटकर , बिखरकर
फिर से खिल जाये
,,,,लक्ष्य@myprerna

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Author
Lakshya thakur
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मेरी रचनाएँ दिल से निकलती हैं जिनमें काव्यशिल्प से ज्यादा भावों का जोर होता है।यहाँ भाव और संवेदनाओं से ही काव्य के माधुर्य का उद्भव हुआ है।

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