आदमी (1)

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- कविता

श्याम-पट पर
अक्षरों की तरह
चमकदार नहीं है
आदमी ।
आदमी अब
अक्षरों पर
श्याम-पट की
तरह काला और
उपयोग के बाद
दीवाल पर
किसी कील के
सहारे टाँगे गए
वस्त्र की तरह
मैला है ।
वैसे आदमी
बहुत कुछ है,
किन्तु-आदमी आज
यदि कुछ नहीं है
तो वह आदमी
नहीं है।क्योंकि-
उसने किया है,
अपना पूरा
वैज्ञानिक-विकास
और वह विकास भी
इस तरह है कि-
उसे अपने आदमी
न होने का
ज़रा भी अफ़सोस
नहीं है ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।
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2 comments
  1. बस यही अपराध में हर बार करता हूँ।
    आदमी हूँ आदमी से प्यार करता हूँ।