आदमी तो आदमी है सिर्फ आदमी

sunil soni

रचनाकार- sunil soni

विधा- गज़ल/गीतिका

हर वक्त हर रोज परेशां है आदमी
कहीँ उनसे कही खुद से परेशां है आदमी।।

नियति का सर्वश्रेष्ट है उपहार आदमी
पर औरो से कही ज्यादा परेशां है आदमी ।।

किसने किया गुनाह सजा किसको है मिली
खुद अपने गुनाह से है गुनहगार आदमी ।।

आए थे सज सवंर के लिए हसरतों का संग
एक रोटी की चाह ने ही तो मारा है आदमी ।।

क्यों सच से दूर ख्वाब सजाता है आदमी
पर मरने के बाद भी तो भटकता है आदमी।।

गर मान लेता जान लेता सच को आदमी
कि आदमी तो आदमी है सिर्फ आदमी।।

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sunil soni
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जिला नरसिहपुर मध्यप्रदेश के चीचली कस्बे के निवासी नजदीकी ग्राम chhenaakachhaar में शासकीय स्कूल में aadyapak के पद पर कार्यरत । मोबाइल ~9981272637

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