आदत भी है बलाय रे भैया, आदत भी है बलाय ।

Anurag Dixit

रचनाकार- Anurag Dixit

विधा- कविता

आदत भी है बलाय रे भैया, आदत भी है बलाय।
खेल-खेल मे शौक-शौक मे
देखो ये लग जाय,
लागी सी फिर ना ये छूटे,
छूटे जग मुश्किल पड जाय
आदत भी है बलाय रे भैया, आदत भी है बलाय।
कमजोरी ये है इन्सां की
बस लाचार बनाय,
भली बुरी कैसी भी आदत
सही कही ना जाय
आदत भी है बलाय रे भइया, आदत भी है बलाय।
बात पते की सुनो सयाने लोग गये बतलाय,
जो ना बदले आदत अपनी खुदा बदल ना पाए,
आदत भी है बलाय रे भैया,आदत भी है बलाय ।

अनुराग दीक्षित
13-09-17

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Anurag Dixit
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मेरा जन्म फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉक के ग्राम कंझाना में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ,मैंने वनस्पति विज्ञानं में एमएससी,ऍम.ए. समाजशाह्स्त्र एवं एडवरटाइजिंग पब्लिक रिलेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया,व जन स्वास्थ्य में,परास्नातक डिप्लोमा किया, विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं अभिव्यंजना साहित्यिक संस्था की आजीवन सदस्य्ता आपके सहयोग एवं सुझाव का आकांक्षी ! अनुराग दीक्षित

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