आत्मा

sudha bhardwaj

रचनाकार- sudha bhardwaj

विधा- लेख

आत्मा

अपनी आत्मा या रूह को हम उस वक्त अपने पास महसूस कर सकते है। जब हम कोई…… अनचाहा कर्म करने को लालायित रहते है।
हम उस वक्त अपनी आत्मा को महसूस करते है जब हम कुछ छिपकर अपराधिक कृत्य करते है। वह जो हमारे हाथो में कम्पन अपने आप से नजरे चुराना अनमने से ढ़ंग से किसी कार्य को सम्पन्न करना। हमारे हृदय की गति भी…… अनियन्त्रित सी प्रतीत होती है।……..
सर्वप्रथम हमारी हृदय की गति हमें हमारे गलत कृत्यो से हमे अवगत करा देती है।कि
हम गलत कर रहे है। यही हमारी अन्तरात्मा की आवाज होती है।
जैसे चोर यदि चोरी करता है तो यह कृत्य शत-प्रतिशत उसकी आत्मा के विरुद्ब होता है।
क्योकि आत्मा एक बार हमें सचेत अवश्य करती है। वह यह कृत्य अपनी अन्तर्रात्मा को नकार कर ही करता है। यह सत्य है कि हमारी रूह हमारी आत्मा में परमात्मा बसते है।
परन्तु जो उस अन्तर्रात्मा की आवाज की अवहेलना कर बुरे कर्मो में लिप्त हो जाते है वे अपनी रूह को आत्मा को मार ड़ालते है।
इसके विपरित जब हम पूर्ण ध्यानावस्था मे होते है तब हम परम् ज्ञान को प्राप्त कर अपनी आत्मा से साक्षात्कार करते है अपने विशुद्ब…. विचारो को हमेशा हमेंशा के लिए दफन कर….. ड़ालते है।
इसलिए हमे अपनी अन्तर्रात्मा को अपने ज्ञान चक्षुओ द्वारा प्रदीप्त कर उसका अनुसरण करना चाहिए।

सुधा भारद्वाज
विकासनगर उत्तराखण्ड

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