आतंकवाद पर दोहे

साहेबलाल 'सरल'

रचनाकार- साहेबलाल 'सरल'

विधा- दोहे

आतंकी को मारकर, देना उन्हें जलाय।
तब ही मरने से डरे, सबसे सही उपाय।1।

सत्य सत्य पहचानना, आतंकी की जात।
कोई इनकी जात नहि, नहि कोई औकात।2।

दानवता मानव कहे, उनको दानव जान।
मानवता आतंक को, लेते जो है मान।3।

जहर लिये मन में फिरे, पाने को सौगात।
दुनिया सारी जानती, क्या तेरी औकात?4?

मौत वरण कर सुखद  ही, मरो नहीं बेमौत।
जीवन जो अनमोल है, काहे नाहक खोत।5।

माना इस संसार में, भांति भांति के भेद।
मानवता की थाल में, जो करते हैं छेद।6।

फिर भी अपनी बात को, करो पटल पर पुष्ट।
बिना पटल पर पुष्ट के, हो मत जाना तुष्ट।7।

पढ़ो लिखो भाई मेरे, तब जानो अधिकार।
कोई बहका नहि सके, तब जीतो संसार।8।

परदे के पीछे छिपा, शातिर बैठा एक।
उसकी मन्सा जान लो, तब बन पाओ नेक।9।

Views 17
Sponsored
Author
साहेबलाल 'सरल'
Posts 45
Total Views 421
संक्षेप परिचय *अभिव्यक्ति भावों की" कविता संग्रह का प्रकाशन सन 2011 *'रानी अवंती बाई की वीरगाथा' की आडियो का विभिन्न मंचो में प्रयोग। *'शौचालय बनवा लो' गीत की ऑडियो रिकार्डिंग बेहद चर्चित। *अनेको रचनाएं देश की नामचीन पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। *छंद विधान के कवि के रूप में देश के विभिन्न अखिल भारतीय मंचो पर स्थान। *संपर्क नम्बर-8989800500, 7000432167
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia