*आतंकवादी* दोहे

Dr.rajni Agrawal

रचनाकार- Dr.rajni Agrawal

विधा- दोहे

"आतंकवादी" दोहे
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(१) आतंकी सैलाब में,दैत्य चलाते नाव।
बंदूकी गोली लिए,देते तन मन घाव।।

(२)आतंकी मजहब नहीं,शतरंजी ये चाल।
नफ़रती तेज़ाब भर,उगल रहा विषकाल।।

(३)मानवता अब रो रही,दहल गया संसार।
कहर ज़ुल्म का झेलता, मनुज करे चीत्कार।।

(४)निंदा करने से नहीं, रुकता अत्याचार।
गोली सीने पर चला,करो वार पर वार।।

(५)पूत लिए निज अंक में,सिसक धरा बतलाय।
दानवता को रौंध कर,अब दो इन्हें जलाय।।

डॉ. रजनी अग्रवाल "वाग्देवी रत्ना"
संपादिक-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी(मो.-9839664017)

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 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

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