आज

विवेक दुबे

रचनाकार- विवेक दुबे

विधा- मुक्तक

आज सूरज चाँद सा खिला है ।
आज एक अहसास नया मिला है ।
है हवाओं में खनक घुंघरुओं की ,
मदहोशी का एक नशा सा घुला है ।
…… विवेक ….

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विवेक दुबे
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मैं विवेक दुबे निवासी-रायसेन (म.प्र.) पेशा - दवा व्यवसाय निर्दलीय प्रकाशन द्वारा बर्ष 2012 में "युवा सृजन धर्मिता अलंकरण" से सम्मान का गौरब पाया कवि पिता श्री बद्री प्रसाद दुबे "नेहदूत" से प्रेरणा पा कर कलम थामी काम के संग फुरसत के पल कलम का हथियार ब्लॉग भी लिखता हूँ "कुछ शब्द मेरे " नाम से vivekdubyji.blogspot.com

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