आज दुनियाँ बन गई बाजार है. (गीतिका)

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- गज़ल/गीतिका

गीतिका
छंद-आनंद-वर्धक,
मापनी- २१२२,२१२२,२१२ ।
(गालगागा,गालगागा,गालगा)
सीमान्त- आर, पदान्त- है ।

गीतिका

आज दुनियाँ बन गई बाजार है ।
आदमी को लाभ की द़रक़ार है ।
भाड़ में जाए धरम, इंसानियत ,
इस तरह चलती यहाँ सरकार है ।
मौत के काँटे बिछे हर राह में ,
घृणा की ही यहाँ पर भरमार है ।
हर तरह अन्याय करते जो यहाँ ,
मिला उनको न्याय का अधिकार है ।
खनकते हैं स्वर्ण के सिक्के वहाँ ,
जहाँ पर पाज़ेब की झनकार है ।
मिटे को ही सब मिटाते हैं यहाँ ,
उग रहे सूरज की जय-जय-कार है ।
ज़िंदग़ी चलती ख़ुदा तेरे भरोसे ,
हुआ मुझको तुझसे बेहद़ प्यार है ।

ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि,शिक्षक ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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