आज के सूचनाक्रान्ति के युग में स्कूल जा रहे बच्चे का भविष्य ? स्कूल की जिम्मेदारी ?

Raju Gajbhiye

रचनाकार- Raju Gajbhiye

विधा- लेख

आज के सूचनाक्रान्ति के युग में स्कूल जा रहे बच्चे का भविष्य ? स्कूल की जिम्मेदारी ?

बच्चे हर मानव के लिए जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है , बच्चों का भविष्य बनाने के लिए ही अभिभावक अपने बच्चे को अच्छे से अच्छा स्कूल में भर्ती करता है | उसे पढ़ने हेतु किसी भी प्रकार से अपने जीवन में समझोता , कटोत्री करकर बच्चों को अच्छे स्कूल में भेजते है |

आज जो कान्वेंट के चमचमाते स्कूल देखे है , बस सामने से बड़े – बड़े अक्षर में अर्थपूर्ण नाम के स्कूल , बड़े राजकीय नेता के स्कूल और वहाँ के कर्मचारी , मैनेजर इनकी बुद्धिमता , विवेकता , आचरण जैसे दिखेंगे वैसे बिलकुल नहीं , हर समय अलग – अलग रोल में मिलेंगे , पूर्ण रूप से मनोविकारी , खुद को सबसे ज्ञानी , अपनी ही बातो को महत्व देंगे , नियम खुद बनायेगे , खुद तोड़ेगे | प्रिंसिपल महोदय बस रबर स्टाम्प , अभिभावक को मक्खन लगाना और मैनेजमेंट को भी सभालना दोनों को हा , हा करना और अच्छी खासी सैलरी लेना , मुझे क्या लेना देना , बाकि जबाबदारी टीचर तो है ना ? और सबसे ज्यादा समज़दार , सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का ज्ञाता , किसीको भी तर्क नहीं करने देना , जो तर्क करता है , उसका काम लगाना वह महाशय स्कूल का समन्वयकर्ता | खुद हर समय तर्क – वितर्क करेंगे , लेकिन दूसरे ने किया उनका दिमाख ख़राब करेंगे | अब बात करते है स्वागताध्यक्ष महोदय की यह अपने आप को लोकसभा – राज्यसभा से भी बढ़कर समझेगा , हर समय रूल , नियम कायदे , यहाँ बैठो , आपके बच्चों ने , आपने नियमो के पालन नहीं किया , लिखकर दो | साफ – सफाई करने वाले , बच्चों को सम्भालनेवाले यह तो मौका पाकर क्या हरकत कर देंगे , यही प्रश्न बड़ा है , इससे ज्यादा बस में ठुस्स – ठुस्स कर भरकर बच्चों को लाने वाले ड्रावर , कंडक्टर , उसे सभालनेवाल सहायक यह भी अपने आप में अनोखे विचारवान मनुष्य रहते है , दया , करुणा , प्रेम सभी उनमे रहकर भी आखिर में विकृत मानसिकता की श्रेणी में आते है | स्कूल के बहार रहने वाले गार्ड यह तो जैसा बोलेगे वैसा ही करना है , कभी – कभी गार्ड भी अनोखे कारनामे करते है , उनके सामने से बच्चों को कोई लेकर जायेगा लेकिन कुछ जानकारी नहीं , अपने ही जीवन की गाड़ी कैसे चलाये यही उलझन में खड़े – बैठे रहना | ग्राउंड की देखभाल करने वाले , योग शिक्षक यह भी महाशय बच्चों के ऊपर अपना गुस्सा निकालना ,किसी प्रकार से बच्चों का गुस्सा करना और किसी भी अभिभावक का मनगंढत विचार रखना |

सब जानते है की शिक्षक गुरु से भी बढ़कर होते है , उनका आदर सत्कार में किसी भी प्रकार से कोई कमी अभिभावक रखते नहीं | लेकिन शिक्षक स्कूल के कार्य से दबे रहते है | कार्य के दबाव के कारण व अपनी भी कुछ न कुछ व्यक्तिगत परेशानी से बच्चों पर गुस्सा निकालते है | आज भी अच्छे शिक्षक है , वह बराबर व्यव्हार करकर बच्चों का भविष्य बना रहे है , अच्छे शिक्षक हमेशा सम्मानीय होते है |

बहोत से अभिभावक है जो लड़ाई झगड़े के विचार में ही रहते है , शिक्षक की सुनते नहीं , अपने बच्चों की कमी देखते नहीं , हमेशा शिक्षक को ही दोषी ठहराते है | लेकिन मैनेजमेंट की राजनीती के राजनेता शिक्षक जो भी अभिभावक शिकायत लेकर आता है उसके बच्चे को टारगेट करकर उसका भविष्य बर्बाद करकर रखता है , बच्चों को प्रताड़ित करना , बच्चे की किसी भी विषय में कमी निकालना , बच्चे को हर बार सही मूल्यांकन नहीं करना , उसे फेल करना आदि , आदि | अभिभावक ऐसे राजनेता शिक्षक से ऐसे डरते है की ,
अगर ज्यादा शिकायत करुगा तो मेरे बच्चे का परीक्षा परिणाम ख़राब होगा | इसीलिए अभिभावक किसी भी शिक्षक की शिकायत करते नहीं | जो भी शिकायत करेगा , उसके बच्चे का काम लग जायेगा समझो | यही बड़े नाम वाले स्कूल में हो रहा है | अपने बच्चों के खातिर बिचारे माँ – बाप चुप रहते है |

नई गाइड लाइन से सुरक्षा पर विचार विमर्श करकर बच्चों की सुरक्षा पर ठोस कदम उठाये जा रहे है , अभिभावक को भी अपने बच्चों की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी है , स्कूल के भरोसे पर ज्यादा रहना नहीं ,
अपने बच्चों की जिम्मेदारी अपनी ही है |

स्कूल ने भी अपनी पारदर्शिता रखना चाहिए | गाइड लाइन का पालन करना चाहिए , ऑडिट रिपोर्ट बराबर पेश करना चाहिए | डमी , गलत जानकारी नहीं देना चाहिए |

बच्चे सच्चे मन के होते है , उसे डराया जाता है , बच्चे हर गतविधि अपने माता पिता को बताना चाहिए , बच्चों को भी अभिभावक ने पूछना चाहिए , बच्चा गुमसुम हो तो तुरंत जानकारी ले , क्या कमी है देखे |बच्चों का बचपन मत खोने दो , उसे पढ़ने दो , उसे खेलने दो , उसका विकास होने दो , बच्चे ही आगे भावी भविष्य है |

– राजू गजभिये

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Raju Gajbhiye
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परिचय - मैं राजू गजभिये , मूलतः यवतमाल ( महाराष्ट्र) मातृभाषा मराठी , वर्तमान में बदनावर जिला धार (मध्य प्रदेश ) कश्यप स्वीटनर्स लिमिटेड में कार्यरत | किताबे पढना एव लेखन | अपितु लिखने का शौक है | व्यग , लेख , कहानी , कविताये , लघुकथा और सामाजिक मुद्दों पर भी लेखन | विज्ञानं साहित्य आदि पर निरंतरता लिखने की कोशिश जारी है | समय-समय पर प्रतिष्टित समाचार - पत्रो , पत्रिकाओ में प्रकाशित होती रहती

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