आज की बेटी

Sonika Mishra

रचनाकार- Sonika Mishra

विधा- कविता

है अग्रसर देश मेरा
पर आज की बेटी कहां है

खुद की आवाज बनती
खुद बिखरती खुद संवरती
पर आज की बेटी कहां है

है ज्वलित हर मुद्दा यहां
खोदता हुआ गड़ा मुर्दा यहां
पर आज की बेटी कहां है

न पक्ष न कोई विपक्ष है
बह रहा स्त्री का दर्द है
पर आज की बेटी कहां है

खोजती रही झरोखों में उजाले
आज के सूरज को देखा कहां है
पर आज की बेटी कहां है

-सोनिका मिश्रा

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Sonika Mishra
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मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||

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