आज का नवयुवक

डी. के. निवातिया

रचनाकार- डी. के. निवातिया

विधा- कविता

आज का नवयुवक

अजीब हाल में दिखता है
आज का नवयुवक
जागा है मगर कुछ खोया खोया सा
हँसता भी है पर कुछ रोया-रोया सा
जीवन संघर्ष की इस दौड़ में
चला जा रहा वो किस डगर
नही जरा खुद को भी खबर…!!

बस चलता जाता है
सुनसान सा, अनजान सा
अज्ञान सा बेजान, बेजुबान सा
खो गया लगता है मंजिल अपनी
हुआ जाता है जैसे पथ भ्रष्ट भी….!!

उत्थान की इस तीव्र गति चकाचौंध में
सिमट के रह गया मोबाइल की ओट में
खो रहा आज जाने क्यों पहचान अपनी
ढलकर पाश्चात्य संस्कृति की होड़ में…!!

सम्भलो मेरे नौजवानो के वक्त अभी बाकी है
दुनिया को तुम्हे कौशल दिखाना अभी बाकि है
घर से लेकर देश तक संभालना अभी बाकी है
करो पथ प्रदर्शित के गर्व से चलना अभी बाकी है…!!

—-ःः डी. के. निवतियाँ ःः———

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डी. के. निवातिया
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नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का ह्रदय से आभारी तथा प्रतिक्रियाओ का आकांक्षी । आप मुझ से जुड़ने एवं मेरे विचारो के लिए ट्वीटर हैंडल @nivatiya_dk पर फॉलो कर सकते है. मेल आई डी. dknivatiya@gmail.com
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