आज ,कल ,कभी

रवि रंजन गोस्वामी

रचनाकार- रवि रंजन गोस्वामी

विधा- शेर

आज उसने बहुत बातें की ,
क्या न कहने की कोशिश की?

सालों तक लटका रहा था,
बस एक पल का फैसला था ।

कभी चाहा था आसमां छू लूँ
अब चाहता हूँ बस सर उठा के चलूँ ।

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