आजमाते हो

सगीता शर्मा

रचनाकार- सगीता शर्मा

विधा- गज़ल/गीतिका

1222/1222/
आजमाते हो

समन तुम क्यू रूलाते हो.
रूला कर फिर मनाते हो

चले जाये सुनो इक दिन.
हमे तुम क्यू सताते हो.

खफा जो हम हुये तुम से
बहाने फिर बनाते हो

सताये याद जब तुम को.
मुहब्बत फिर जताते हो.

तुम्हारे थे तुम्हारे है
हमे क्यू आजमाते हो..

पकड़ कर हाथ गैरो का
जला कर मुस्कुराते हो.

संगीता शर्मा.
1/3/2017

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सगीता शर्मा
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परिचय . संगीता शर्मा. आगरा . रूचि. लेखन. लघु कथा ,कहानी,कविता,गीत,गजल,मुक्तक,छंद,.आदि. सम्मान . मुक्तर मणि,सतकवीर सम्मान , मानस मणि आदि. प्यार की तलाश कहानी पुरस्क्रति.धूप सी जिन्दगी कविता सम्मानित.. चाबी लधु कथा हिन्दी व पंजाबी में प्रकाशित . संगीता शर्मा.

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