“आओ अधरामृत पान करें ।”

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- गीत

मैं छल प्रपंच न जानूँ प्रिये,
उर प्रीत को ही मानूँ प्रिये,
प्रणय अधर पर है लहराई
मिलकर इसका सम्मान करें,
आओ अधरामृत पान करें ।
.
चक्षु ह्रदय का तुम खोलो,
नैनों से अब कुछ बोलो,
दृग ने है प्रेम सुधा बरसाई,
प्रणय निवेदन का मान करें,
आओ अधरामृत पान करें।
.
इस मन पर तेरा ही राज है,
इन सांसों में तेरा ही साज है,
ॠतु मधुमास चहुंओर है छाई,
राग प्रेम का हम भी गान करें,
आओ अधरामृत पान करें ।
@पूनम झा। कोटा, राजस्थान।
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पूनम झा
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मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

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