आओ मिल गणतंत्र मनाएं

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कविता

आओ मिल गणतंत्र मनाएं
जीवन में अनुपम प्रकाश के रंग भरे, उल्लास सजाएं

राष्ट्र हमारा कल गुलाम था
आज स्वयं हम ही गुलाम है
अवनति- हिंसामय रोगों से,
एंठू है, हम सिर्फ चाम है
सोई आत्मा, आँसू गम के,
निकल रहे, कुछ तो शर्माएं
आओ मिल गणतंत्र मनाएं

कहीं लूट,इज्जत औ धन की
बन बैठे हम हिंसक -सनकी
जीवित हैं, गह अहंकार को,
चिंता नाहीं इनको जन की
स्वयं सुधरिए ,जग सुधरेगा,
नारे को कुछ तो अपनाएं
आओ मिल गणतंत्र मनाएं

जय-जय, केवल है भाषा में
मन ,दूरी की परिभाषा में
अंतःकरण मिले ना भैया
बुद्धि, प्रेम की अभिलाषा में,
बैठी ,यह अज्ञान तिमिर है
दिल-सुबोल को कर्म बनाएंं
आओ मिल गणतंत्र मनाएं

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

-मेरी इस रचना को मेरे Facebook पेज
" Brijesh Nayak की रचनाएं" मैं पढ़ा जा सकता है|

– गणतंत्र दिवस दिनांक 26-01- 2017 को मेरे द्वारा यह रचना मेरे(Brijesh Nayak के)Facebook पेज " Brijesh Nayak की रचनाएं" में पोस्ट की गई थी |
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उक्त रचना में "गणतंत्र" शब्द को "गणतंत्र दिवस" के अर्थ में प्रयोग किया गया है |
26जनवरी को "गणतंत्र दिवस" प्रतिवर्ष भारतवर्ष में मनाया जाता|
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09-05-2017

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

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