सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कविता

सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं |
जीवन में अनुपम प्रकाश के रंग भरे, उल्लास सजाएं

राष्ट्र हमारा कल गुलाम था
आज स्वयं हम ही गुलाम है
अवनति- हिंसामय रोगों से,
एंठू है, हम सिर्फ चाम है
सोई आत्मा, आँसू गम के,
निकल रहे, कुछ तो शर्माएं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

कहीं लूट,इज्जत औ धन की
बन बैठे हम हिंसक -सनकी
जीवित हैं, गह अहंकार को,
चिंता नाहीं इनको जन की
स्वयं सुधरिए ,जग सुधरेगा,
नारे को कुछ तो अपनाएं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

जय-जय, केवल है भाषा में
मन ,दूरी की परिभाषा में
अंतःकरण मिले ना भैया
बुद्धि, प्रेम की अभिलाषा में,
बैठी ,यह अज्ञान तिमिर है
दिल-सुबोल को कर्म बनाएंं
सद् गणतंत्र सुदिवस मनाएं

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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09-05-2017

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367

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