आए कोई पास मेरे, अपना बनाने आए !

Anurag Dixit

रचनाकार- Anurag Dixit

विधा- कविता

आए कोई पास मेरे, अपना बनाने आए !
खोलकर अपनी उनीदी पलकें,
अपने ख्वाबों को मेरे दिल में सजाने आए
राह कट जाएगी यूँ ही चलके
दो कदम जो वो मेरे साथ बढ़ाने आए
आए कोई पास मेरे, अपना बनाने आए !
तुम भी एक रोज़ चलो कोई बहाना कर के ,
तुम से मिलने को हमें लाख बहाने आए
मेरी हसरत के खिले फूल ये मुरझा कर के,
कैसे आँखों में ये दो बूँद सुहाने आए
आए कोई पास मेरे, अपना बनाने आए !

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Anurag Dixit
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मेरा जन्म फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉक के ग्राम कंझाना में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ ग्रामीण परिवेश में ही पालन पोषण एवं प्रारंभिक शिक्षा हुई हिंदी साहित्य से मेरा प्रेम प्रारंभिक शैक्षणिक जीवन से ही प्रारम्भ हो गया था, विज्ञानं का विद्यार्थी होते हुए भी मैं अधिकांश वक़्त साहित्य की पुस्तकों को दिया करता था जिसके फलस्वरूप मुझे कई बार डांट भी पड़ती थी लेखन कार्य ग्यारहवीं कक्षा के बाद

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