II जरूरी है II

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- कविता

आंखों की भाषा से आगे,
बढ़ना जरूरी है l
शब्द ना दे साथ फिर भी,
कहना जरूरी है ll

आंखों का क्या खुशी में भी,
आंसू बहाती है l
आंखों के दरिया से आगे,
निकलना जरूरी है ll

हर घड़ी है इम्तहां,
सोना नहीं अब तो l
हो कठिन राहें मगर,
चलना जरूरी है ll

आस है फिर भी,
एक मुलाकात की l
नामुमकिन नहीं कुछ,
बताना जरूरी हैll

संजय सिंह "सलिल "
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

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