आँखों में क्यूँ नमी रहे

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़र चाँदनी खिली रहे
तो दूर तीरग़ी रहे

अरमान सारे ख़ाक़ हैं
बस दिल में बेबसी रहे

खुशियाँ मिली है सारी तो
आँखों में क्यों नमी रहे

रूठो न यार तुम मुझसे
ये दोस्ती बनी रहे

आखों से जाम छलका दे
फिर दूर तिश्नग़ी रहे

जब तक रहे तू सामने
ये सांस भी रुकी रहे

दामन छुड़ा न मुझसे तू
कुछ देर और खड़ी रहे

मँहगाई ने रुला दिया
अब ये न मुफ़लिसी रहे

अब हम जहाँ मिलें सनम
वो शाम क्यूँ ढली रहे

तेरे बग़ैर होठों पर
फ़रियाद इक दबी रहे

"प्रीतम" न प्यार हो जुदा
सबको सनम मिली रहे

प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
2212 1212

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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