अश्रु-नाद

Dr. umesh chandra srivastava

रचनाकार- Dr. umesh chandra srivastava

विधा- मुक्तक

खो गयी प्रेम की नगरी
झंझा-झंकोर घन घेरे ।
हो हाहाकार हृदय में
सुन अश्रु-नाद को मेरे ।।

लघु बूँदे ले मतवाला
नभ से ऐ ! नीरद माला ।
बुझने दे आँसू-नद से
अभिलाषाओं की ज्वाला ।।

मम् व्यथित हृदय से आती
अंतर्मन में अकुलाती ।
जीवन की नित अभिलाषा
आँसू बनकर बह जाती।।

Views 7
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr. umesh chandra srivastava
Posts 51
Total Views 381
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
One comment