अश्रु- नाद

Dr. umesh chandra srivastava

रचनाकार- Dr. umesh chandra srivastava

विधा- मुक्तक

…… मुक्तक …..

… अनबूझ नियति ने खेली
जीवन की दुखद पहेली
हे! विकल वेदने मेरी
बन जाओ सुखद सहेली

परिहास किया जीवन का
निर्मल निरीह निर्धन का
मैं विकल अकिञ्चन फिरता
संताप छिपाये मन का

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

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Dr. umesh chandra srivastava
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Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India

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