अश्रुनाद स्व- भावानुवादित

Dr. umesh chandra srivastava

रचनाकार- Dr. umesh chandra srivastava

विधा- मुक्तक

. …. मुक्तक ….

उन्मत्त लहर लहराती
तिमिराञ्चल में अकुलाती
शशि मिलने को ललचा कर
उत्तुंग ज्वार बन जाती

स्व- भावानुवादित

Undulate frantic Waves of water .
Eager in the darkness of sphere .
Covet , try to meet with moon .
Billow become Tide over .

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

Sponsored
Views 3
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr. umesh chandra srivastava
Posts 46
Total Views 399
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia