अश्रुनाद स्व- भावानुवादित

Dr. umesh chandra srivastava

रचनाकार- Dr. umesh chandra srivastava

विधा- मुक्तक

. …. मुकक …

हिय मिलन चाह गहराये
दृग- नीर धार बन जाये
अविरल अभिलाषा मन की
बन प्रेम- सिन्धु लहराये

. स्व- भावानुवादित

To meet , heart has deep desired .
Water of eyes , become out flowed .
Lust of soul has uninterrupted .
Makes love like sea uncurled .

डा. उमेश चन्द्र श्रीवास्तव
लखनऊ

Sponsored
Views 3
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr. umesh chandra srivastava
Posts 46
Total Views 448
Doctor (Physician) ; Hindi & English POET , live in Lucknow U.P.India

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia