अश्को का अक्स नजर आया है

NIRA Rani

रचनाकार- NIRA Rani

विधा- कविता

अक्सर खुद को खुद से फरेब करते पाया है
दिल मे कुछ जुबॉ को कुछ और कहते पाया है

ओस की बूंदो को जो देखा जी भर के
तो खुद के अश्को का ही अक्स नजर आया है

बह गए कितने किस्से उन अश्को की गली मे
हर किस्से मे तेरा वजूद नजर आया है

बारिश की बूंदे कह गई कुछ किस्से नूरानी
भीगे बिस्तर पर किस्सा तेरा ही नजर आया है

टूटते सितारे से कुछ भी मॉगू कैसे
खुद के सितारों को बेवजह टूटते हुए पाया है

Sponsored
Views 70
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
NIRA Rani
Posts 63
Total Views 2.8k
साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia