अवधी रचना- सावन माँ मन भावन है.

प्रदीप तिवारी 'धवल'

रचनाकार- प्रदीप तिवारी 'धवल'

विधा- गीत

सावन माँ मन भावन है, शिव डमरू से फूट रही रसधारा,
खेतन, बागन, मेडन मा, हरियाली लपेटे तयार है चारा,
गोरु बछेरू पशू औ परानी के साथे जवान सेवान है सारा,
धरती की छाती मा रोपै बदे करजोरि बोलावत धान बेचारा.

दामिनि दमकै नभ से भुई तक ओरौनी बहे जस मोट पनारा,
काली घटा घनघोर घिरी दिन ही मा देखाय परा है सितारा,
देह बुढान सयान भई, नस – नस मा बहे सिंगार की धारा,
दुइनौ परानी कै आँख लड़ी, फिर बंद भवा पूरी रात केवारा.

खटिया छोटवार अटारी लिहे,है ओनात किसान कै धीरज प्यारा,
अपनी चनरमा कै सोभा लखी, सुहुराई रजत पायजेब तुम्हारा,
बिजुरी बिन जब अंधियार परे,पट खोल करो मुख से उजियारा,
आज धना अस खेल करो, कि उठाये से हम ना उठी भिनसारा.

सेज पे रोज ही सोवत हौ, तन औ मन आज बिछाए है दारा,
कंता बिना सुस्ताये चलो, जब तक नभ मा चमके ध्रुव तारा,
मेल – मिलाप की बारिश मा, धरती ठंड्हाय बुझे अंगारा,
प्रेम – पयोधि के सागर मा, बूड़े उतराय जहान ई सारा.

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 149
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
प्रदीप तिवारी 'धवल'
Posts 19
Total Views 8.1k
मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी दो पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी हैं. अगनित मोती को आप (amazon.in) पर भी देख और खरीद सकते हैं. हिंदी और अवधी में रचनाएँ करता हूँ. उप संपादक -अवध ज्योति. वर्तमान में एयर कस्टम्स ऑफिसर के पद पर लखनऊ एअरपोर्ट पर तैनात हूँ. संपर्क -9415381880

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia