अलहड़ बेटी

umesh mehra

रचनाकार- umesh mehra

विधा- गज़ल/गीतिका

मैं अलबेली अलहड़ बेटी ,हूँ मैं बड़ी सयानी ।
घर ऑगन की शोभा हूँ मैं, पापा की हूँ रानी ।।
खाना पीना पढना लिखना सब कुछ अच्छा लगता है ।
माँ की डांट भाई से झगड़ा मुझको अच्छा लगता है ।।
पंख मिले तो उड़ जाऊं मैं, आसमान को छू आऊँ ।
पर्वत भी गर आये राह में ,उससे भी टकरा जाऊँ ।।
छेड़ोगे तो बनूँ शेरनी ,नहीं तो तितली रानी ।
मैं अलबेली ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।।
न मैं अबला न बेचारी ,न मैं दया की पात्र हूँ ।
मेरी भी है कुछ इच्छाये ,मैं बस नारी मात्र हूँ ।।
फूलों सी नाजुक हूँ लेकिन, उर में हृदय कठोर है ।
भेदभाव अब नहीं सहूंगी,नये समय की भोर है ।।
नभ हो थल हो या जल की करनी हो निगरानी ।
रख काँधे बंदूक बनूँ में, हिन्द देश की सेनानी ।।
मै अलबेली,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,।
पापा का मैं गौरव बनकर ,अपना नाम कमाऊ ।
नारी की शक्ति है क्या,ये दुनिया को बतलाऊं ।।
जल की हूँ मैं अविरल धारा ,रूकने का अब काम नहीं ।
जब तक मंजिल मिले न मुझको,थकने का अब काम नहीं ।।
बेटा है इक घर का राजा मैं दो कुलों की महारानी ।
मैं अलबेली अलहड़ बेटी हूँ मैं बड़ी सयानी ।।

उमेश मेहरा
गाडरवारा (मध्य प्रदेश )
9479611151

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 27
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
umesh mehra
Posts 13
Total Views 225

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia