” ———————- अलसाई सी धूप “

भगवती प्रसाद व्यास

रचनाकार- भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

विधा- दोहे

रात दिवस ठंडे लगते, शीतलता चहुँ ओर !
गरम गरम की चाहना, मदमाती सी भोर !!

निखरी निखरी है छटा, निखरा निखरा रूप !
अलसाया सूरज लगे, अलसाई सी धूप !!

चढ़ी कपकपी बदन पर, सरदी है खुशहाल !
मक्के की रोटियां कहीं, सजता हलवा थाल !!

बदन कसरती चाहिये, मौसम है अनुकूल !
खाया पीया अंग लगे, रोग चटायें धूल !!

पढ़ने में चित मन लगे, लगती प्यारी नींद !
आँखों में सपने सजे, वक्त दिखाये सींग !!

बिछी बर्फ की चादर है, काँप रहा बुढ़ापा !
जोशे जवानी मस्त है, मस्ती राग अलापा !!

बृज व्यास

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एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में रचनाओं का प्रकाशन ! एक लम्हा जिन्दगी , रूह की आवाज , खनक आखर की एवं कश्ती में चाँद साझा काव्य संग्रह प्रकाशित ! e काव्यसंग्रह "कहीं धूप कहीं छाँव" एवं "दस्तक समय की " प्रकाशित !

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