अर्चना मेरी है तू

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- गज़ल/गीतिका

21-06-2016

सांसों में बसी है तू
ज़िन्दगी बनी है तू

तुझसे कैसे हूँ जुदा
दिल की आशिकी है तू

चाहें सब कहे गलत
मैं कहूँ सही है तू

मेरे सब सवालों का
बस जवाब ही है तू

डर नहीं अँधेरों का
मेरी रौशनी है तू

साये की तरह सदा
मेरे सँग चली है तू

भीगता रहे ये मन
सावनी झड़ी है तू

तुझमे ही दिखे खुदा
'अर्चना' मेरी है तू

डॉ अर्चना गुप्ता

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Dr Archana Gupta
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Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

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3 comments
  1. डा अर्चना गुप्ता जी!
    आपकी ग़ज़ल ” अर्चना मेरी है तू” शीर्षक बहुत उम्दा ।
    ” भींगता रहे है मन / सावनी झड।ी है तू ” बहुत शानदार ! बधाई !
    — जितेन्द्र कमल आनंद
    २७-१०-१६