अमलतास तरु एक मनोहर

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- कविता

ग्रीष्म ताप पर प्रतिस्पर्धा में
जीत सदा ही वो पाता है
पीत वसन में सँवर सँवर कर
जो लहर लहर मुस्काता है ।

तप्त हवा के संस्पर्शों से
मोहक रूप निखर जाता है ,
झूमे यौवन की मस्ती में
पुष्प – मुकुट धर इठलाता है ।

अमलतास तरु एक मनोहर
जिसको संग धूप का भाता
शीतल छाया सबको देकर
अहंकार से शीश उठाता ।

डॉ रीता
आया नगर , नई दिल्ली

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 29
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Rita Singh
Posts 68
Total Views 2.5k
नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia